Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
गाय-à¤à¥ˆà¤‚स जैसे पशà¥à¤“ं में अकà¥à¤¸à¤° फूल दिखने या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का बाहर निकल आना की समसà¥à¤¯à¤¾ देखने को मिलती है, जिसका पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन खानपान की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से ठीक नहीं होता है। जिन पशà¥à¤“ को उनकी आवशà¥à¤¯à¤•ता से कम पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार और मिनरल मिकà¥à¤¸à¤šà¤°, विटामिनà¥à¤¸ जैसे जरूरी आहार नहीं दिया जाता है, à¤à¤¸à¥‡ पशà¥à¤“ं में ये समसà¥à¤¯à¤¾ देखने को मिलती है। à¤à¥ˆà¤¸à¥‡à¤‚ गायों से पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ के कई महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में अलग होती हैं जो उनको पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ संबंधी कई बीमारियों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अतिसंवेदनशील बनाती हैं और उनकी पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को कमतर करती हैं। किसानों को à¤à¤¾à¤°à¥€ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाने वाली बीमारियों में से à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤µ से पहले गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ à¤à¥ˆà¤‚सों की फूल/पिछा दिखाने की समसà¥à¤¯à¤¾ है, जिसमें गाà¤à¤¿à¤¨ पशॠजोर लगाता है और उसकी योनि और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ का पिछला हिसà¥à¤¸à¤¾ शरीर से बाहर आ जाता है। फूल दिखाने की यह समसà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¿à¤®à¤¿à¤ªà¥‡à¤°à¤¸ (पहली बार बचà¥à¤šà¤¾ देने वाले) पशà¥à¤“ं की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में à¤à¤• से अधिक बार बचà¥à¤šà¥‡ दे चà¥à¤•े पशà¥à¤“ं में अधिक पाई जाती है। यह मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के आखिरी 2-3 महीने में ही होती है, लेकिन 5-6 महीने की गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ à¤à¥ˆà¤‚सों में à¤à¥€ यह बीमारी देखी गयी है।
फूल दिखने की समसà¥à¤¯à¤¾ शà¥à¤°à¥‚आत गाय/à¤à¥ˆà¤‚सों में फूल दिखाने की समसà¥à¤¯à¤¾ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से बचà¥à¤šà¤¾ जनने से पहले ही होती है। आमतौर पर यह समसà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के 15-60 दिन पहले शà¥à¤°à¥‚ होती है। रोग की शà¥à¤°à¥‚आत में à¤à¥ˆà¤‚स के बैठने पर छोटी गेंद के समान रचना योनिदà¥à¤µà¤¾à¤° पर दिखाई देती है। à¤à¥ˆà¤‚स के खड़े होने पर यह योनिदà¥à¤µà¤¾à¤° के अनà¥à¤¦à¤° चली जाती है। धीरे-धीरे इसका आकार बढ़ता रहता है और इसमें मिटà¥à¤Ÿà¥€, à¤à¥‚सा व कचरा चिपकने लगता है। इसके कारण à¤à¥ˆà¤‚स को जलन होती है और वह पीछे की ओर जोर लगाने लगती है। जिस कारण से समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ती जाती है और जटिल हो जाती है।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ तो कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‡ और कौवे इसकी ओर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ होकर शरीर के बाहर निकले हà¥à¤ à¤à¤¾à¤— को काटने लगते हैं। बीमारी के लकà¥à¤·à¤£ फूल दिखाने की समसà¥à¤¯à¤¾ को पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों के शरीर से बाहर निकलने और बीमारी की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ के हिसाब से मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से तीन तरीकों से देखा जाता है –
पहली अवसà¥à¤¥à¤¾ – इस हालात में जब पशॠबैठा या लेटा हà¥à¤† होता है तो योनि शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤® योनि के बाहर निकलता है, लेकिन जब पशॠखड़ा होता है तो अंदर चला जाता है।
दूसरी अवसà¥à¤¥à¤¾ – जब पशॠखड़ा होता हैं तो शरीर से बाहर निकला हà¥à¤† पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंग बाहर ही रहता है जिसमे योनि शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤® ही मà¥à¤–à¥à¤¯ à¤à¤¾à¤— होता है।
तीसरी अवसà¥à¤¥à¤¾ – इसमें योनि के साथ-साथ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ à¤à¥€ शरीर के बाहर आ जाती है और पशॠअतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• जोर लगाता है। इस तरह से फूल दिखाने की समसà¥à¤¯à¤¾ जो मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के अंतिम दिनों से जà¥à¥œà¥€ होती है निमà¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤° से लेकर जानलेवा à¤à¥€ हो सकती है। इससे जà¥à¥œà¥‡ मà¥à¤–à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ हैं- पशॠके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गोबर व पेशाब करते वकà¥à¤¤ जोर लगाना योनि के बाहर पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों का लटका रहना बाहर निकले हà¥à¤ मास की सूजन गाà¤à¤¿à¤¨ पशà¥à¤“ं में पेशाब की रूकावट मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤ इस रोग से जà¥à¥œà¥€ होती है. अत: पशॠके बाहर निकले हà¥à¤ अंगों को जब शरीर के अंदर किया जाता है तो उसके बाद पशॠअधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पेशाब करता है।
पशॠसà¥à¤¸à¥à¤¤ हो जाते हैं और खाना-पीना छोड़ देते हैं। गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ की सील टूटने से गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता है। समय पर इलाज ना करने से अंगों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होकर यह पशॠके खून में à¤à¥€ फैल सकता है जिससे पशॠकी मौत à¤à¥€ हो सकती है। ये à¤à¥€ पढ़ें: गाà¤à¤¿à¤¨ à¤à¥ˆà¤‚स की इस तरह करें देखà¤à¤¾à¤², नहीं होगा घाटा फूल दिखाने या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का बाहर आ जाना (पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤ªà¥à¤¸ ऑफ यूटà¥à¤°à¤¸) कई बार गाय व à¤à¥ˆà¤‚सों में पà¥à¤°à¤¸à¤µ के 4-6 घंटे के अंदर गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ बाहर निकल आता है, जिसका उचित समय पर उपचार न होने पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाती है। कषà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के बाहर निकलने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अधिक रहती है। इसमें गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ उलà¥à¤Ÿà¤¾ होकर योनि से बाहर आ जाता हैं और पशॠइसमें पà¥à¤°à¤¾à¤¯: बैठजाता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ और अंदर के अनà¥à¤¯ अंगों को बाहर निकलने की कोशिश में पशॠजोर लगाता रहता है जिससे कई बार गà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ à¤à¥€ बहार आ जाता है और सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और गमà¥à¤à¥€à¤° हो जाती है। फूल दिखाने या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के बाहर निकलने के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण à¤à¥‹à¤œà¤¨ में सूखे चारे की अधिक मातà¥à¤°à¤¾- पशà¥à¤“ं के à¤à¥‹à¤œà¤¨ में सूखे चारे जैसे गेहूं का à¤à¥‚सा, की अधिक मातà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ फूल दिखाने की समसà¥à¤¯à¤¾ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° कारक है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे पशॠगोबर करते वकà¥à¤¤ अधिक जोर लगाता है जिससे योनि और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ के पिछले हिसà¥à¤¸à¥‡ का बाहर निकलने का खतरा बॠजाता है। कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी- पशà¥à¤“ं के आहार में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का निमà¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤° à¤à¥€ फूल दिखाने के समसà¥à¤¯à¤¾ से जà¥à¥œà¤¾ हà¥à¤† है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का निमà¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤° गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ पशà¥à¤“ं में पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंगों के ढीला होने के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होता है। जब गाà¤à¤¿à¤¨ पशॠगोबर या पेशाब करने के लिठजोर लगाता है तो उसके साथ ही योनि और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ का पिछला हिसà¥à¤¸à¤¾ शरीर से बाहर आ जाता है।
वसा का अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• जमाव- à¤à¥ˆà¤‚सों की कोख़ में à¤à¥€ वसा /चरà¥à¤¬à¥€ के अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• जमा होने की वजह से योनि के आस-पास दबाव बॠजाता है, जिससे फूल दिखाने की समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ का उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤°- गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के छह महीने के बाद à¤à¥ˆà¤‚सों में फूल दिखाने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अधिक होती है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के अंतिम समय में à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ के उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° को à¤à¥ˆà¤‚सों में फूल दिखाने का à¤à¤• कारण माना जाता है। à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ का यह बà¥à¤¾ सà¥à¤¤à¤° पà¥à¤ े और योनिदà¥à¤µà¤¾à¤° के ढीला होने के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होता है जिससे योनि और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ का पिछला हिसà¥à¤¸à¤¾ शरीर से बाहर आ जाता है। पशà¥à¤“ं को खिलाये जाने वाले कà¥à¤› हरे-चारे जैसे कि बरसीम, सड़े हà¥à¤ जौ और मकà¥à¤•ा इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ में à¤à¥€ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ का अधिक सà¥à¤¤à¤° पाया जाता है तथा गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के अंतिम दिनों में इनके अधिक खिलाने से पशà¥à¤“ं में फूल दिखाने का डर बना रहता है। कषà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¸à¤µ जिसके उपचार के लिठबचà¥à¤šà¥‡ को खींचना पड़ता है पà¥à¤°à¤¸à¤µ से पूरà¥à¤µ योनि का बाहर आना जेर का गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ से बाहर न निकलना उपचार व रोकथाम:- जैसे ही पशॠमें गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के बाहर निकलने का पता चले उसे दूसरे पशà¥à¤“ं से अलग कर देना चाहिठताकि बाहर निकले अंग को दूसरे पशà¥à¤“ं से नà¥à¤•सान न हो। बाहर निकले अंग को गीले तौलिठया चादर से ढक देना चाहिठऔर यदि संà¤à¤µ हो तो बाहर निकले अंग को योनि के लेवल से थोड़ा ऊंचा रखना चाहिठताकि बाहर निकले अंग में खून इकटà¥à¤ ा न हो। बाहर निकले अंग को अपà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से अंदर नहीं करवाना चाहिठबलà¥à¤•ि उपचार के लिठशीघà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¿à¤¶à¥€à¤˜à¥à¤° पशॠचिकितà¥à¤¸à¤• को बà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¾ चाहिà¤à¥¤ यदि पशॠमें कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी है तो कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® सà¥à¤¬à¤¹ और शाम में नियमित रूप से दिया जाता है। बाहर निकले अंग को गरà¥à¤® पानी या फिर सेलाइन के पानी से ठीक पà¥à¤°à¤•ार साफ कर लिया जाता है। यदि गà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤¹à¥à¤¯ के साथ जेर à¤à¥€ लगी हà¥à¤ˆ है तो उसे जबरदसà¥à¤¤à¥€ निकलने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती। हथेली के साथ सावधानी पूरà¥à¤µà¤• गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ को अंदर किया जाता है और उसे अपने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रखने के उपरांत योनि दà¥à¤µà¤¾à¤° में टांके लगा दिठजाते हैं। इस बीमारी में यदि पशॠका ठीक पà¥à¤°à¤•ार से इलाज न करवाया जाठटो पशॠसà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ बांà¤à¤ªà¤¨ का शिकार हो सकता है। अत: पशॠपालक को इस बारे में कà¤à¥€ ढील नहीं बरतनी चाहिà¤à¥¤ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में पशॠकी उचित देख à¤à¤¾à¤² करने तथा उसे अचà¥à¤›à¥‡ किसà¥à¤® के खनिज मिशà¥à¤°à¤£ से साथ सनà¥à¤¤à¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार देने से इस बीमारी की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को कम किया जा सकता है।पशà¥à¤“ं को कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® तथा विटामिन ई व सेलेनियम देने से à¤à¥€ लाठहो सकता है। कैसे करें बचाव? गाय/à¤à¥ˆà¤‚स को साफ-सà¥à¤¥à¤°à¥€ जगह बांधें, जिससे निकले हà¥à¤ à¤à¤¾à¤— पर à¤à¥‚सा व गंदगी न लग सके। कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‡ और कौवे à¤à¤¸à¥‡ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर न जा सकें। अनà¥à¤¯ पशॠà¤à¥€ उससे दूर रहें। à¤à¥ˆà¤‚स को à¤à¤¸à¥€ जगह बांधें, जो आगे से नीचा तथा पीछे से 2-6 इंच ऊंचा हो। इससे पेट का वजन बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€/ योनि पर दवाब नहीं डाल पाता है। à¤à¥ˆà¤‚स को सूखा चारा (तूड़ी/à¤à¥‚सा) न खिलाà¤à¤‚। हरा चारा होना चाहिठऔर दाने में चोकर व दलिया पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें। पà¥à¤°à¤¸à¤µ तक चारे की मातà¥à¤°à¤¾ थोड़ी कम ही रखें। इस बात का विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि à¤à¥ˆà¤‚स को कबà¥à¤œ न होने पाठव गोबर पतला ही रहे। à¤à¥ˆà¤‚स के आहार में रोजाना 50-70 गà¥à¤°à¤¾à¤® कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® यà¥à¤•à¥à¤¤ खनिज लवण मिशà¥à¤°à¤£ अवशà¥à¤¯ मिलायें। ये खनिज मिशà¥à¤°à¤£ दवा विकà¥à¤°à¥‡à¤¤à¤¾ के यहां अनेक नामों (à¤à¤—à¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¨, मिनीमिन, मिलà¥à¤•मिन इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿) से मिलते हैं। खनिज लवण मिशà¥à¤°à¤£ पर ISI मारà¥à¤• लिखा होना चाहिये। शरीर निकलने पर योनि को साफ व ठणà¥à¤¡à¥‡ पानी से धोà¤à¤‚, जिससे उस पर à¤à¥‚सा व मिटà¥à¤Ÿà¥€ न लगी रहे। पानी में लाल दवाई डाल सकते हैं। पानी में à¤à¤¸à¥€ कोई दवा न डालें जिससे योनि में जलन होने लगे। नाखून काटकर साफ हाथों से योनि को अंदर धकेल दें तथा नरà¥à¤® रसà¥à¤¸à¥€ की à¤à¤‚ड़ी बाà¤à¤§ दें। à¤à¤‚डी बांधते समय यह धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि यह अधिक कसी न हो तथा पेशाब करने के लिठ3-4 अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ जितनी जगह रहे। रोग की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• दवाइयों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जा सकता है (पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥‡à¤ªà¥à¤¸-इन, कैटिल रिमेडीज अथवा पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥‡à¤ªà¥à¤¸-कà¥à¤¯à¥‹à¤°) । इसके अतिरिकà¥à¤¤, होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• दवाई (सीपिया 200X की 10 बूà¤à¤¦à¥‡à¤‚ रोजाना) पिलाने से à¤à¥€ लाठमिल सकता है। गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ होने पर पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• से समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• करें। पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤¶à¤• व संवेदनाहरण के लिठटीका लगाते हैं। जिससे पशॠजोर लगाना बंद कर देता है। अब शरीर के बाहर निकले हà¥à¤ à¤à¤¾à¤— को साफ कर तथा अंदर करके टाà¤à¤•े लगा देते हैं। इसके बाद à¤à¥ˆà¤‚स को कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की बोतल, आधी रकà¥à¤¤ में तथा आधी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे लगा देते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¨ का टीका à¤à¥€ à¤à¥ˆà¤‚स को लगा दिया जाता है। परनà¥à¤¤à¥ इसमें यह सावधानी रखी जाती है कि बचà¥à¤šà¤¾ देने में अà¤à¥€ 10 दिन से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बचे हों। योनि के उपर लगे टाà¤à¤•ों को बचà¥à¤šà¤¾ देने के समय खोल दिया जाता है। पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤•ालीन अपà¤à¥à¤°à¤‚श (फूल दिखना) सà¤à¥€ अपà¤à¥à¤°à¤‚श में (फूल दिखने) यह सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है। समय पर उपचार न होने के कारण à¤à¥ˆà¤‚स मर सकती है। यह बचà¥à¤šà¤¾ जनने के तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ बाद या 4-6 घंटे के अंदर हो जाता है। बड़े आकार के अथवा विकृत बचà¥à¤šà¥‡ को जबरदसà¥à¤¤à¥€ जनन नलिका से बाहर खींचने के कारण पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ बाहर आ जाता है। बà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥‡ के बाद जेर को जबरन खींचने से à¤à¥€ अपà¤à¥à¤°à¤‚श की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है। इसमें à¤à¥ˆà¤‚स बैठी रहती है तथा गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के लटके à¤à¤¾à¤— पर लडà¥à¤¡à¥‚ जैसी संरचनाà¤à¤‚ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ नजर आती है। इन पर जेर à¤à¥€ चिपकी हो सकती है। थोड़ा सा छेड़ने पर इनमें से खून à¤à¥€ निकलने लगता है। उपचार:- à¤à¥ˆà¤‚स को अलग बांध कर रखें। गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ को लाल दवा यà¥à¤•à¥à¤¤ ठणà¥à¤¡à¥‡/बरà¥à¤«à¥€à¤²à¥‡ पानी से धोकर, à¤à¤• गीले तौलिठसे ढक दें ताकि गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ सूखने न पाये तथा उस पर मकà¥à¤–ियाठन बैठें à¤à¤µà¤®à¥ à¤à¥‚सा व गोबर à¤à¥€ न चिपके। इसके बाद तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• से समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• करें। पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ को साफ करके, जेर निकालकर गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ को उचित विधि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अंदर कर देते हैं तथा योनि पर टाà¤à¤•ें लगा देते हैं ताकि गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ पà¥à¤¨: बाहर न निकले। इसके बाद à¤à¥ˆà¤‚स को कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, ऑकà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ व à¤à¤‚टीबायोटिक दवाइयाठआवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤° लगाई जाती हैं। पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¾à¤‚त अपà¤à¥à¤°à¤‚श:- यह मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से बचà¥à¤šà¤¾ देने के कà¥à¤› दिनों बाद शà¥à¤°à¥‚ होता है। इसका मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण जनन नलिका में कोरà¥à¤‡ घाव या संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। यह घाव व संकà¥à¤°à¤®à¤£ पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति के समय गलत तरीके से बचà¥à¤šà¤¾ निकालने से, अथवा गंदे हाथों से जेर निकालने से हो जाता है। योनि से अकà¥à¤¸à¤° बदबूदार मवाद निकलता है तथा à¤à¥ˆà¤‚स अकà¥à¤¸à¤° पीछे की ओर जोर लगाती है। उपचार :- उपचार के लिठततà¥à¤•ाल पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• से समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• करना चाहिà¤à¥¤ पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ व योनि को साफ करके उसमें à¤à¤‚टीबायोटिक गोलियाà¤/दà¥à¤°à¤µ रख देते हैं। संकà¥à¤°à¤®à¤£ समापà¥à¤¤ होने तक इलाज करवाना चाहिà¤à¥¤ कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® आदि के टीके à¤à¥€ आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤° लगाये जा सकते हैं। सावधानियाठà¤à¤µà¤®à¥ रोकथाम :- योनि अपà¤à¥à¤°à¤‚श अकà¥à¤¸à¤° वंशानà¥à¤—त देखने को मिलता है। अत: पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ में सावधानी बरतें। à¤à¥ˆà¤‚स को 40-50गà¥à¤°à¤¾à¤® कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® यà¥à¤•à¥à¤¤ खनिज लवण मिशà¥à¤°à¤£ नियमित रूप से खिलायें। गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में बचà¥à¤šà¤¾ फंसने पर उसे जबरदसà¥à¤¤à¥€ अथवा गलत विधि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ न निकालें/निकलवाà¤à¤‚। जेर निकलवाने के लिठअधिक जोर न लगाया जाà¤à¥¤ शरीर के निकले à¤à¤¾à¤— की सफाई का विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें। उसे जूती दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कà¤à¥€ अनà¥à¤¦à¤° न करें। अपà¤à¥à¤°à¤‚श होने पर शीघà¥à¤° पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• की सलाह लें। फूल दिखाने में देशी हरà¥à¤¬à¤² दवाइयां:- इस बीमारी में कई देशी हरà¥à¤¬à¤² दवाइयां काफी फायदेमंद हैं लेकिन अधिक पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥‡à¤ªà¥à¤¸ वाले पशà¥à¤“ं को सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में à¤à¤• बार कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जरूर चढवाà¤à¤‚। अगर पशॠअधिक जोर लगा रहा है तो à¤à¤ªà¥€à¤¡à¤¯à¥‚रेल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ दिया जा सकता है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ à¤à¤‚टीबायोटिक, à¤à¤‚टीइंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ से उपचार इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगवाठजा सकते हैं। पशॠको à¤à¤¸à¥‡ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर बांधे कि जिससे कि पीछे का हिसà¥à¤¸à¤¾ उपर रहे। रात के समय पशॠको à¤à¤°à¤ªà¥‡à¤Ÿ चारा दें। 24 घंटे निगरानी में रखें। फूल दिखाठतो ठंडे पानी में लाल दवाई या लाल पोटास से साफ कर चढ़ाà¤à¥¤ पशॠको 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® गà¥à¤¡, 150 मिली लीटर कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤®, 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® लहसà¥à¤¨, 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® हलà¥à¤¦à¥€ पाउडर, 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤¯à¤¾à¥›, 200 गà¥à¤°à¤¾à¤® à¤à¤¸à¤¬à¤—ोल का पाउडर तथा 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® काला नमक के साथ पेसà¥à¤Ÿ बनाकर 250 गà¥à¤°à¤¾à¤® बेसन 150 गà¥à¤°à¤¾à¤® सरसों के तेल मे मिलकर रोज खिलाये कम से कम 7 दिन तथा ईसको पà¥à¤¨à¤ƒ रिपिट करे अगले महीने मे। इससे इस समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान जलà¥à¤¦à¥€ मिलने लगता है । इसके साथ साथ पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• के सलाह से 15 दिन के अंतराल पे 10 à¤à¤®à¤à¤² फोसà¥à¤«à¥‹à¤°à¥‹à¤¸, 10 à¤à¤®à¤à¤² नेऊरोकà¥à¤¸à¥€à¤¨ 12, तथा 20 à¤à¤®à¤à¤² कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤® का इंजेकà¥à¤Ÿà¥€à¤“न (लगातार 3 दिन) लगवाà¤à¥¤
| --------------------------- | --------------------------- |